
एलाचार्य श्री की आज्ञानुवर्ती शिष्या संघ नायिका आर्यिका श्री गुरु नंदिनी माताजी ने सभा ओ संबोधित करते हुए कहा कि भक्ति के चार आयाम होते हैं:- समर्पण, निस्वार्थ, श्रद्धा और दृढ़ता जो कृष्ण नगर जैन समाज में देखने को मिली और यदि ऐसी भक्ति बनी रही तो एक दिन आप भी भक्त से भगवन बन सकते हो.एलाचार्य श्री कि आज्ञानुवर्ती शिष्या गणिनी आर्यिका श्री विद्याश्री माताजी ने अपने मंगल प्रवचन में दृष्टान्त देते हुए कहा कि णमोकार महामंत्र सब दुखों को नष्ट करने वाला है और जीवन धरा को मोक्ष तक ले जाने वाला है.
कार्यक्रम में “की ऑफ़ नोलेज” प्रतियोगिता का भी विमोचन हुआ जिसे भरकर फरवरी अंत तक देना होगा और 7 मार्च को उसका परिणाम घोषणा होगी.अंत में पूज्य एलाचार्य श्री वसुनंदी जी मुनिराज ने अपने उद्बोधन में सभा को संबोधन देते हुआ कहा कि इस वाचना का प्रारंभ जिनवानी की गोधी में बोधी से हुआ था और अंत संविधान के साथ हो रहा है.जिसके जीवन में जिनवानी का बोध हो जाता है उसके जीवन में निश्चित ही संविधान का शोध हो जाता है.अपने जीवन में जब तक तुम संविधान को नहीं बनोगे तब तक गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस मानना निष्फल है.जब डॉ. भीम राव आंबेडकर ने महात्मा गाँधी को भारत का नवीन संविधान दिखाया तब महात्मा गाँधी ने यही बोला कि जब तक अपने आप को हम अनुशासित नहीं करेंगे तब तक इस संविधान का कोई लाभ नहीं होगा,और जब हम अपने आप अनुशासित कर लेंगे तब भी इस संविधान कि कोई आवश्यकता नहीं होगी.यहाँ कृष्ण नगर में २३ दिन का प्रवास वास्तव में बहुत ही ज्ञान प्रद रहा और यहाँ इतने सारे स्वाध्याय प्रेमी देखकर मुझे आचार्य हो रहा है कि दिल्ली जैसे प्रान्त में भी जिनवानी के प्रति इतनी जागरूकता है.आप सब इसी प्रकार से जिनवानी कि सेवा करते रहे यहीं हमारी मंगल भावना है और सभी को आशीर्वाद देते हुए पूज्य एलाचार्य श्री ने अपनी बात को विराम दिया.
पूज्य संघ नायिका आर्यिका श्री गुरुनंदिनी माताजी ससंघ का मंगल विहार शकरपुर के लिए हुआ और गणिनी आर्यिका श्री विद्याश्री माताजी ससंघ का मंगल विहार राधेपुरी के लिए हुआ.भोजनोपरांत पुन्हा सभा एकत्रित हुई पूज्य गुरुदेव को कृष्ण नगर से विदाई देने के लिए और सभी ने भीगे नेत्रों से पूज्य गुरुदेव का मंगल विहार कृष्ण नगर से शंकर नगर जैन मंदिर के लिए कराय