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	<title>Vasunandi</title>
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	<description>Parichay Antaratma se</description>
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		<title>आर्यिका श्री सिद्धनंदिनी माताजी बनीं श्रीमती मंजू जैन</title>
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		<pubDate>Fri, 11 May 2012 02:43:45 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Ankit Jain</dc:creator>
				<category><![CDATA[News]]></category>

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		<description><![CDATA[दिन रात मेरे स्वामी,मैं भावना ये भाऊ देहांत के समय में तुमको न भूल जाऊ  ये पंक्तियाँ हम लोग प्रतिदिन पढ़ते हैं फिर भी समाधि पूर्वक मरण का सौभाग्य सभी को प्राप्त नहीं होता.कुछ नेहद पुण्यशाली जीव होते हैं जिनकी संतों गुरुओं के सानिध्य व निर्देशन में समाधि संपन्न होती है. ऐसी ही एक महँ [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: center;"><strong>दिन रात मेरे स्वामी,मैं भावना ये भाऊ</strong></p>
<div style="text-align: center;"><strong>देहांत के समय में तुमको न भूल जाऊ </strong></div>
<div>ये पंक्तियाँ हम लोग प्रतिदिन पढ़ते हैं फिर भी समाधि पूर्वक मरण का सौभाग्य सभी को प्राप्त नहीं होता.कुछ नेहद पुण्यशाली जीव होते हैं जिनकी संतों गुरुओं के सानिध्य व निर्देशन में समाधि संपन्न होती है. ऐसी ही एक महँ पुण्यशाली जीव शकरपुर निवासी श्रीमती मंजू जैन धर्मपत्नी श्री वीरेन्द्र जैन (वाडमेर वाले) की अस्वस्थता के चलते हस्पताल में इलाज चल रहा था और जब अंत में डॉक्टरों ने उम्मीद छोड़ दी तब पूज्य गुरुदेव एलाचार्य श्री ने उनकी उम्मीद जगाई.श्री वीरेन्द्र जैन सभी परिवार के साथ पूज्य श्री से समाधि पूर्वक मरण करने का निवेदन किया.पूज्य श्री ने श्रीमती मंजू जैन की भावना को देखते हुए उन्हें निर्यापकाचार्य के रूप में समाधि करने की स्वीकृति प्रदान की.दिनांक ०९ मई को रात्रि ७:३० बजे श्रीमती मंजू जैन को शकरपुर लाया गया और पूज्य श्री ने संबोधन देते हुए सात प्रतिमा के व्रत प्रदान किये और नाम रखा ब्र.ब्राह्मी दीदी.पूज्य श्री द्वारा सीमंधर स्वामी का ध्यान,भ.आदिनाथ और भ.महावीर स्वामी का ध्यान, तीर्थों का ध्यान, आदि कराते हुए उनके चित्त और चेतना को जागरूक रखा. ब्र.ब्राह्मी दीदी ने रात्रि ११:३० बजे दीक्षा हेतु श्रीफल चढ़ाया तब पूज्य गुरुदेव ने उनकी क्षमता और भावना को देखते हुए क्षुल्लिका दीक्षा के संस्कार १२:१५ बजे समाज और परिवार की स्वीकृति पूर्वक किये और नाम रखा क्षुल्लिका श्री सर्वज्ञनंदिनी माताजी.पिच्छि, कमंडल, शास्त्र, जाप माला, वस्त्र, पात्र आदि भेंट किये.माताजी ने भी जरुक अवस्था पूर्वक सबको आशीर्वाद प्रदान किया.सबसे क्षमा मांगते हुए अपने चित को जाप में लगाये रखा.प्रातः काल ८ बजे आहार चर्या के पश्चात् पूज्य माताजी ने आर्यिका दीक्षा हेतु प्रार्थना की तब पूज्य गुरुदेव ने परिस्थिति और भावना को देखते हुए उन्हें ९ बजे आर्यिका दीक्षा के संस्कार करते हुए आर्यिका श्री सिद्धनंदिनी माताजी नाम से पुकारा.माताजी निरंतर स्वसंघ प्रवर्तिका स्र्यिका श्री गुरुनंदिनी माताजी ससंघ के वचनों को सुन रही थी.शाम ५:४७ बजे अंतिम सांस ली और समता पूर्वक प्राणों को त्याग दिया.सब ओर खबर फ़ैल गई ओर हजारों की संख्या में श्रावक जन उपस्थित हो गए ओर यमुना बैंक मेट्रो स्टेशन के निकट उनके पार्थिव शारीर को अग्नि को समर्पित कर दिया.उपस्थित जन समूह ने गोला चढाते हुए पूज्य माताजी के शारीर के अंतिम दर्शन प्राप्त किये.</div>
<div>ऐसी जागरूक समाधि परम पूज्य राष्ट्र संत, श्वेतपिच्छाचार्य श्री विद्यानंद जी मुनिराज के आशीर्वाद,परम पूज्य अभीक्ष्ण ज्ञानोपयोगी एलाचार्य श्री वसुनंदी जी मुनिराज के निर्देशन एवं स्वसंघ प्रवर्तिका आर्यिका श्री गुरु नंदिनी माताजी के सानिध्य में संपन्न हुई.समाधि के चलते माताजी को ८ संतों का सानिध्य ओर दर्शन प्राप्त हुआ.</div>
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		<title>लोह पुरुष की उपाधि से अलंकृत हुए पूज्य एलाचार्य श्री वसुनंदी जी मुनिराज</title>
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		<pubDate>Tue, 03 Apr 2012 02:29:41 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Ankit Jain</dc:creator>
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		<description><![CDATA[दिल्ली:परम पूज्य राष्ट्र संत श्वेत पिच्छाचार्य श्री विद्यानंद जी मुनिराज के प्राण प्रिय शिष्य प.पू. अभीक्ष्ण ज्ञानोपयोगी एलाचार्य श्री वसुनंदी जी मुनिराज का तृतीय एलाचार्य पदारोहण दिवस बेहद आनंदमाय व अभूतपूर्व प्रभावना के साथ संपन्न हुआ.02 अप्रैल सोमवार को प्रातः 10:30 बजे जब श्री दिगम्बर जैन मंदिर, लोधी कालोनी से श्री सत्य साईं इंटरनॅशनल ऑडिटोरियम, [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>दिल्ली:परम पूज्य राष्ट्र संत श्वेत पिच्छाचार्य श्री विद्यानंद जी मुनिराज के प्राण प्रिय शिष्य प.पू. अभीक्ष्ण ज्ञानोपयोगी एलाचार्य श्री वसुनंदी जी मुनिराज का तृतीय एलाचार्य पदारोहण दिवस बेहद आनंदमाय व अभूतपूर्व प्रभावना के साथ संपन्न हुआ.02 अप्रैल सोमवार को प्रातः 10:30 बजे जब श्री दिगम्बर जैन मंदिर, लोधी कालोनी से श्री सत्य साईं इंटरनॅशनल ऑडिटोरियम, लोधी रोड के लिए गमन हुआ तो सारा माहौल जयकारों से गूंज उठा.समारोह स्थल पर पहुचते ही ध्वजारोहण कर श्री राजकमल जैन सरावगी ग्रीन पार्क ने सौभाग्य प्राप्त किया.मंच पर सर्वप्रथम श्री चमनलाल जैन (अध्यक्ष, राजगढ़ जैन समाज) ने मंच उद्घाटन कर समरह को गति प्रदान की तथा हमारे आराध्य भ.अजितनाथ,हमारे आदर्श आ.शान्तिसागर जी,हमारे गुरु आ.विद्यानंद जी व हमारे पथ प्रदर्शक एला.वसुनंदी जी के चित्रों का अनावरण किया गया.दीप प्रज्ज्वलन कर श्री गजेन्द्र जैन, इंदौर व रविसेन मनोज जैन (इशु जींस) ने समारोह देदीप्यमान किया. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री,भारत सरकार से श्री प्रदीप जैन &#8216;आदित्य&#8217; व अति विशिष्ट अतिथि के रूप में श्री अरविंदर सिंह लवली (शिक्षा व परिवहन मंत्री, दिल्ली सरकार) एवं स्टार न्यूज़ के चीफ एडिटर श्री दीपक चौरसिया उपस्थित हुए. आयोजक संसथान द्वारा प्रदीप जैन &#8216;आदित्य&#8217; व अरविंदर सिंह लवली को <strong>&#8220;कर्त्तव्य निष्ठ शासक&#8221;</strong> की उपाधि से सम्मानित किया गया. केंद्रीय मंत्री और दिल्ली सरकार के मंत्रियों द्वारा पूज्य एलाचार्य श्री को <strong>&#8220;लोह्पुरुष&#8221;</strong> की मानक उपाधि से अलंकृत किया गया. अपनी स्वर लहरियों से जैन भजन सम्राट श्री रूपेश जैन ने सबको मंत्र मुग्ध कर दिया और इसी अवसर पर उन्हें <strong>&#8220;स्वर सम्राट&#8221;</strong> की उपाधि से सम्मानित किया गया.श्री प्रदीप जैन&#8217;आदित्य&#8217;,श्री अरविंदर सिंह लवली,श्री दीपक चौरसिया,श्री मुनीश्वर जैन (ग्रीन पार्क),बा.ब्र.इन्द्र कुमार जैन आदि ने अपनी विनयांजलि प्रस्तुत की.सस्थान द्वारा श्री टीनू जैन, श्री नीरज जैन, श्री पंकज जैन,श्री इशु जैन को <strong>&#8220;युवा रत्न&#8221;</strong> तथा श्रीमती मिथलेश जैन व श्रीमती सुधा जैन को <strong>&#8220;महिला रत्न&#8221;</strong> की उपाधि से सम्मानित किया गया.प्रतिष्ठाचार्य श्री मनोज शास्त्री जी को <strong>&#8220;प्रतिष्ठा रत्नाकर&#8221;</strong> की उपाधि से सम्मानित किया गया.कार्यक्रम के मध्य मंगलगीत के माध्यम से बा.ब्र.शिल्पी दीदी व बा.ब्र.साक्षी दीदी ने समारोह को मगलमय कर दिया.श्रेष्ठी श्रावकों ने पद प्रक्षालन, पूजन, आरती, शास्त्र भेंट, जाप माला भेंट व पिच्ची भेंट कर पुण्यार्जन किया. कार्यक्रम में पूज्य एलाचार्य श्री वसुनंदी जी मुनिराज, मुनि श्री ज्ञानानंद जी एवं मुनिश्री सर्वानन्द जी मुनिराज की पिच्छि परिवर्तन भी संपन्न हुआ जिसमे मुनि श्री सर्वानन्द जी की पुरानी पिच्छि श्री निकुंज जैन संगम विहार, मुनिश्री ज्ञानानंद जी की श्री संजय जैन&#8217;कागजी&#8217; लक्ष्मी नगर और पूज्य एलाचार्य श्री की श्री राजकमल अनीता जैन ग्रीन पार्क को प्राप्त हुई. अंतिम चरण पूज्य गुरुदेव के चातुर्मास हेतू अतिशय क्षेत्र जम्बूस्वामी जी बोलखेडा, जेवर, मेरठ, हस्तिनापुर,सरधना,ग्रीन पार्क (दिल्ली),तिजारा, फिरोजाबाद आदि नगरों के साथ साथ धर्म जागृति संसथान, दिल्ली प्रदेश द्वारा दिल्ली में चातुर्मास हेतू श्रीफल चढ़ाये गए.अंत में पूज्य एलाचार्य श्री वसुनंदी जी मुनिराज द्वारा मंगल कल्याणकारी अमृतवाणी सुन सबने स्वयं को धन्य माना और चातुर्मास हेतू बस एक ही संकेत दिया की जहा भी चातुर्मास होगा पूज्य गुरुदेव आचार्य श्री विद्यानंद जी मुनिराज की अनुमति व आज्ञा से होगा.सबको वात्सल्य पूर्वक आशीर्वाद देकर अपनी वाणी को विराम दिया और पूजन व आरती के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ.</p>
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		<title>ऐतिहासिक रूप से संपन्न हुआ शंकर नगर में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा</title>
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		<pubDate>Thu, 01 Mar 2012 02:54:51 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Ankit Jain</dc:creator>
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		<description><![CDATA[श्री महावीर दिगम्बर जैन मंदिर, शंकर नगर की जैन समाज लगभग 2 साल से योग्य गुरु की राह देख रहा था जिसके कारण से पंचकल्याणक प्रतिष्ठा संपन्न न हो पा रही थी.06 नवम्बर 2011 को पूज्य एलाचार्य श्री वसुनंदी जी मुनिराज का संघ सहित पदार्पण मात्र 01 सप्ताह के लिए हुआ लेकिन गुरु की चर्या [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>श्री महावीर दिगम्बर जैन मंदिर, शंकर नगर की जैन समाज लगभग 2 साल से योग्य गुरु की राह देख रहा था जिसके कारण से पंचकल्याणक प्रतिष्ठा संपन्न न हो पा रही थी.06 नवम्बर 2011 को पूज्य एलाचार्य श्री वसुनंदी जी मुनिराज का संघ सहित पदार्पण मात्र 01 सप्ताह के लिए हुआ लेकिन गुरु की चर्या और सरलता को देखते हुए सम्पूर्ण समाज ने उनके सानिध्य में दिल्ली का ऐतिहासिक पंचकल्याणक करवाने की ठान ली.सबकी सहमति और गुरु निर्देश से श्री मज्जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा 24 फरवरी से 29 फरवरी 2012 तक संपन्न कराना तय हुआ.<br />
समाज के उत्साह और गुरु के सार्थक उपदेशों के माध्यम से पंचकल्याणक की समस्त तैयारियां संपन्न हुई.पंचकल्याणक प्रतिष्ठा हेतु परम पूज्य श्वेतपिच्छाचार्य श्री विद्यानंद जी मुनिराज का पूर्ण आशीर्वाद प्राप्त हुआ और पूज्य एलाचार्य श्री का सानिध्य हेतु अपने सम्पूर्ण संघ लगभग 18 पिच्छि सहित १५ फरवरी को विशाल जनसमूह और शोभा यात्रा के साथ संपन्न हुआ.ये दिल्ली के लगभग 50 सालों के इतिहास में पहली बार था जब इतना विशाल संघ का सानिध्य पंचकल्याणक प्रतिष्ठा में प्राप्त हो रहा था.<strong>24 फरवरी</strong> को झंडारोहण के साथ कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ और प्रथम दिन गर्भ कल्याणक की पूर्व क्रियाओं को प्रतिष्ठाचार्य श्री पवन दीवान और प्रतिष्ठाचार्य श्री मनोज शास्त्री के निर्देशन में विधि पूर्वक संपन्न किया.रात्रि में मूल क्रियाओं के साथ साथ माता के सोलह सपने भी दिखाए गए.<strong>25 फरवरी</strong> को गर्भ कल्याणक का उत्तर रूप दिखाया गया और गर्भ कल्याणक की पूजा संपन्न हुई तथा रात्रि में छप्पन कुमारियों तथा अष्ट कुमारियों द्वारा माता से तत्व सम्बन्धी प्रश्न पूछे गए गए व उनकी सेवा की गई.<strong>26 फरवरी</strong> रविवार का दिन अपने आप में बेहद महत्वपूर्ण दिन था.इस दिन अग्यानुवर्ती आर्यिका त्रय गणिनी श्री विद्याश्री,आर्यिका श्री विधाश्री व आर्यिका श्री गुरुनंदनी माताजी का 18वाँ दीक्षा दिवस आयोजित किया गया और गर्भस्थ तीर्थंकर का जन्म संपन्न हुआ.पश्चात सौधर्म इन्द्र की ऐतिहासिक शोभा यात्रा निकली गई जो लगभग 1.5 कि.मी. लम्बी थी जिसमे हाथी, घोड़े, बग्गियाँ, झाकियां, बैंड, पंजाब, हरियाणा, उत्तरांचल, राजस्थान आदि राज्यों के ताशे, आर्मी बैंड आदि अनेकों आकर्षक मनोरंजक सामग्री का समावेश था.विशाल पांडुकशिला पर बालक आदिकुमार का 1008 कलशों से अभिषेक किया गया और ऐतिहासिक रूप से पुष्पक विमान (हेलिकॉप्टर) द्वारा पुश वर्षा कि गई.संध्याकाल में बालक का पलना झुलाया गया और प्रसिद्द गायक प्रसन्न कुमार द्वारा भजन संध्या का आयोजन किया गया.<strong>27 फरवरी</strong> को प्रातः बाल क्रीडा और नंदा सुनंदा से विवाह की झलकियाँ दिखाई गयी.दोपहर में राजा नाभिराय द्वारा राज्याभिषेक और पश्चात् राजा ऋषभदेव द्वारा षट कर्म उपदेश तथा पुत्री ब्राह्मी सुन्दरी को अंक एवं लिपि ज्ञान देते हुए दिखाया गया.यहाँ भी ऐतिहासिक कार्य संपन्न हुआ क्यूंकि ब्राह्मी और सुंदरी ने विवाह न करने का संकल्प लिया था तो पात्र करते हुए दो बालिकाओं ने अपने जीवन में ही ये नियम पूज्य एल्चार्य श्री से ग्रहण कर लिया.सभा में नीलांजना की मृत्यु देख वैराग्य और पुत्र भरत बाहुबली को पट्ट राज्याभिषेक कर दीक्षा लेने की झलकियाँ दिखाई.जिन व्यक्तियों ने आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत पालन करने का नियन उन्हें ही प्रथम बार पालकी उठाने का सौभाग्य मिला.अंत में पूज्य गुरुदेव द्वारा दीक्षा क्रियाएं संपन्न हुई और महामुनि वृषभनाथ ध्यान में लीं हो गए.सायं काल प्रवचन सभा के बाद जैन भजन सम्राट मधुर कंठ धारी रूपेश जैन नाइट का आयोजन किया गया.<strong>28 फरवरी</strong> को प्रातः काल महामुनि वृषभ नाथ की आहार चर्या राजा श्रेयांस के यहाँ संपन्न हुई और दोपहर में पंचकल्याणक का मूल कार्य प्रारंभ हुआ जिसमे प्रतिमाओं का अंकन्यास और मंत्रन्यास के साथ साथ पूज्य एलाचार्य श्री वसुनंदी जी मुनिराज द्वारा सूरी मंत्र दिया गया.बस यही पल था जब पत्थर को परमात्मा बनाया गया समस्त क्रियाएं संपन्न होने के पश्चात् समवशरण की रचना हुई जिसमे मुनि, आर्यिका, श्रावक, श्राविका, देव, देवी व पशुओं का समागम हुआ.पूज्य गुरुदेव की गणधर के रूप में दिव्या ध्वनि खीरी व सभी ने अपनी अपनी जिज्ञासा का समाधान भी किया.संध्याकाळ में बाल ब्र.आशीष भैया द्वारा प्रवचन सभा की गई और प्रसिद्ध कवी डॉ.कुमार विश्वास की मुख्यता में विशाल कवि सम्मलेन संपन्न हुआ.प्रातः महीने की अंतिम तारीख <strong>29फरवरी</strong> को पंचकल्याणक का अंतिम कल्याणक मोक्ष कल्याणक की क्रयाएँ संपन्न हुई जिसमे कैलाश पर्वत की सुंदर व भव्य रचना की गे जहाँ से केवली रिषभदेव को मोक्ष प्राप्त हुआ.विशाल रथयात्रा के साथ सभी नूतन जिन्बिम्बों को मंदिर लाया गया और वेदी में विधि विधान पूर्वक प्रतिष्ठित किया गया.श्री महावीर दिगम्बर जैन मंदिर शंकर नगर में नवनिर्मित द्वय वेदी पर रत्नमई चौबीसी विराजमान की गई है.<br />
इन सभी आयोजनों की सफलता पूर्वक संपन्न होने के लिए पूज्य राष्ट्रसंत आचार्य श्री विद्यानंद जी मुनिराज का मंगल आशीर्वाद और पूज्य एलाचार्य श्री वसुनंदी जी मुनिराज कुशल निर्देशन व सानिध्य के साथ साथ समाज के सभी उत्साही बंधुओं को श्री जाता है.यदि ऐसे उत्साही और कर्मठ कार्यकर्ता यदि हर समाज में हो तो हर कार्यक्रम अपने आप में ऐतिहासिक ही होगा.शंकर नगर जैन समाज को हार्दिक शुभकामनाएं</p>
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		<title>अतिशय क्षेत्र जय शांतिसागर निकेतन मंडोला में संपन्न हुए पंचकल्याणक</title>
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		<pubDate>Fri, 10 Feb 2012 02:06:35 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Ankit Jain</dc:creator>
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		<description><![CDATA[परम पूज्य राष्ट्र संत श्वेत पिच्छाचार्य श्री विद्यानंद जी मुनिराज के पूर्ण आशीर्वाद एवं उनके परम प्रभावक शिष्य परम पूज्य अभीक्ष्ण ज्ञानोपयोगी संत एलाचार्य श्री वसुनंदी जी मुनिराज के ससंघ सानिध्य तथा पूज्य ऐलक श्री विज्ञानं सागर जी महाराज के निर्देशन में अतिशय क्षेत्र जय शांतिसागर निकेतन मंडोला(गाज़ियाबाद) में श्री मज्जिनेन्द्र जिनबिम्ब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>परम पूज्य राष्ट्र संत श्वेत पिच्छाचार्य श्री विद्यानंद जी मुनिराज के पूर्ण आशीर्वाद एवं उनके परम प्रभावक शिष्य परम पूज्य अभीक्ष्ण ज्ञानोपयोगी संत एलाचार्य श्री वसुनंदी जी मुनिराज के ससंघ सानिध्य तथा पूज्य ऐलक श्री विज्ञानं सागर जी महाराज के निर्देशन में अतिशय क्षेत्र जय शांतिसागर निकेतन मंडोला(गाज़ियाबाद) में श्री मज्जिनेन्द्र जिनबिम्ब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव ०३ फरवरी से ०८ फरवरी तक सानंद संपन्न हुआ.इस अवसर पर ०३ व ०४ फरवरी को गर्भ कल्याणक की क्रिया संपन्न हुई, ०५ फरवरी रविवार को जन्म कल्याणक महोत्सव में विशाल शोभा यात्रा,पालना महोत्सव,आदि क्रियाएं संपन्न हुई,०६ फरवरी को राज्याभिषेक, षट्कर्म उपदेश और दीक्षा कल्याणक मनाया गया,संध्याकालीन सांस्कृतिक कार्यक्रम में मशहूर जादूगर टनाटन का कार्यक्रम संपन्न हुआ और ०७ फरवरी ओ प्रातः महामुन आदिकुमार का आहार और मध्य काल में केवलज्ञान क्रिया संपन्न हुई तत्पश्चात समवशरण रचना हुई जिसमे पूज्य एलाचार्य श्री गणधर के रूप में विराजित हो धर्म उपदेश दिया.संध्याकालीन सांस्कृतिक कार्यक्रम में जैन भजन सम्राट रूपेश जैन नाईट का आयोजन हुआ.०८ फरवरी को प्रातः काल भगवन के मोक्ष कल्याणक की क्रियाएं संपन्न कर सभी जिनबिम्ब वेदी में विराजमान किये गए.कार्यक्रम में अत्यंत भक्ति भाव के साथ साथ विशाल समूह का समागम हुआ.आयोजन में पूज्य एलाचार्य श्री वसुनंदी जी मुनिराज, मुनि श्री सकलकीर्ति जी मुनिराज, मुनि श्री ज्ञानानंद जी,श्री सर्वानन्द जी, श्री जिनानंद जी मुनिराज, ऐलक श्री विज्ञानसागर जी, क्षुल्लक श्री विशंक सागर जी,श्री ज्ञान सागरजी,श्री सुखानंद जी, श्री सहजानंद जी महाराज, क्षुल्लिका श्री भक्तिभूषण जी एवं श्री पूजाभूषण माताजी का सानिध्य प्राप्त हुआ.<br />
पूज्य गुरुदेव ससंघ विहार कर ११ फरवरी को इन्द्रापुरी (लोनी) पहुंचे जहाँ १२ फरवरी को पंचकल्याणक के पात्रों का चयन होगा.यहाँ १२ मार्च से १७ मार्च तक भव्य पंचकल्याणक प्रतिष्ठा संपन्न होंगी.</p>
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		<title>कृष्ण नगर में संपन्न हुई चारो अनुयोग वचन 26 जनवरी को</title>
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		<pubDate>Tue, 31 Jan 2012 02:35:58 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Ankit Jain</dc:creator>
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		<description><![CDATA[परम पूज्य राष्ट्र संत श्वेत्पिच्छाचार्य श्री विद्यानंद जी मुनिराज के परम प्रभावक, प्रयाग्र शिष्य, स्वाध्याय प्रेमी परम पूज्य अभीक्ष्ण ज्ञानोपयोगी एलाचार्य श्री वसुनंदी जी मुनिराज ससंघ के परम पुनीत पवन सानिध्य में 03 जनवरी से 26 जनवरी तक चारों अनुयोग वाचना श्री दिगम्बर जैन मंदिर में आयोजित हुई.महाधवला (भाग 1) जैसे महा सिद्धान्तिक ग्रन्थ की [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<div>परम पूज्य राष्ट्र संत श्वेत्पिच्छाचार्य श्री विद्यानंद जी मुनिराज के परम प्रभावक, प्रयाग्र शिष्य, स्वाध्याय प्रेमी परम पूज्य अभीक्ष्ण ज्ञानोपयोगी एलाचार्य श्री वसुनंदी जी मुनिराज ससंघ के परम पुनीत पवन सानिध्य में 03 जनवरी से 26 जनवरी तक चारों अनुयोग वाचना श्री दिगम्बर जैन मंदिर में आयोजित हुई.महाधवला (भाग 1) जैसे महा सिद्धान्तिक ग्रन्थ की वाचना सुनने का लाभ मात्र गुरुमुख से ही संभव जो इस वर्ष दिल्ली को पहली बार दिगम्बर संत एलाचार्य श्री वसुनंदी जी मुनिराज के श्रीमुख से सुनकर लाभान्वित हुए.इस वाचना का विधिवत शुभारम्भ 03 जनवरी को मंगल कलश स्थापना,दीप प्रज्ज्वलन,मंगलाचरण आदि कार्यक्रमों के साथ हुआ और प्रतिदिन प्रातः जिनसहस्रनाम स्तोत्र की कक्षा,तत्पश्चात प्रवचन,द्रव्य संग्रह की कक्षा,दोपहर में महाधवला वाचना, सायं काल में प्रथमानुयोग कथानक जिसमे बेहद सुंदर रूप से पूज्य एलाचार्य श्री द्वारा एक रूपक अलंकारों सहित कथानक का चित्रण सुनाया एवं अंत में बच्चों के लिए कलम पट्टी बुधिका,महिलाओं के लिए तत्वार्थ सूत्र आदि कक्षाएं संघस्थ साधुओं व् त्यागियों द्वारा संपन्न हुई.26 जनवरी को प्रातः महाधवला ग्रन्थ की वाचना का विधिवत समापन किया गया और प्रातः 12 बजे से समारोह का आयोजन हुआ जिसमे मंगलाचरण कर श्रीमती प्रमिला जैन ने अपने मधुर स्वर से सम्पूर्ण वातावरण मंगलमय कर दिया.पूज्य आचार्य श्री विद्यानंद जी मुनिराज और एलाचार्य श्री वसुनंदी जी मुनिराज के चित्रों का अनावरण श्री राकेश जैन व श्री पियूष जैन द्वारा किया गया और दीप प्रज्ज्वलन कर ज्ञान ज्योति की स्थापना की.पूज्य एलाचार्य श्री की संघस्थ ब्रह्मचारिणी गरिमा दीदी व लघिमा दीदी ने मंगलगीत प्रस्तुत किया.उपस्थित विद्वानों ने पूज्य श्री संघ को शास्त्र भेंट किये और अतिथि सत्कार स्थानीय समाज द्वारा संपन्न हुआ.सभा में उपस्थित प्रतिष्ठाचार्य पं. श्री मनोज शास्त्र जी एवं पं.श्री पम प्रकश जी ने भी अपने भाव व्यक्त किये.</div>
<p>एलाचार्य श्री की आज्ञानुवर्ती शिष्या संघ नायिका आर्यिका श्री गुरु नंदिनी माताजी ने सभा ओ संबोधित करते हुए कहा कि भक्ति के चार आयाम होते हैं:- समर्पण, निस्वार्थ, श्रद्धा और दृढ़ता जो कृष्ण नगर जैन समाज में देखने को मिली और यदि ऐसी भक्ति बनी रही तो एक दिन आप भी भक्त से भगवन बन सकते हो.एलाचार्य श्री कि आज्ञानुवर्ती शिष्या गणिनी आर्यिका श्री विद्याश्री माताजी ने अपने मंगल प्रवचन में दृष्टान्त देते हुए कहा कि णमोकार महामंत्र सब दुखों को नष्ट करने वाला है और जीवन धरा को मोक्ष तक ले जाने वाला है.<br />
कार्यक्रम में &#8220;की ऑफ़ नोलेज&#8221; प्रतियोगिता का भी विमोचन हुआ जिसे भरकर फरवरी अंत तक देना होगा और 7 मार्च को उसका परिणाम घोषणा होगी.अंत में पूज्य एलाचार्य श्री वसुनंदी जी मुनिराज ने अपने उद्बोधन में सभा को संबोधन देते हुआ कहा कि इस वाचना का प्रारंभ जिनवानी की गोधी में बोधी से हुआ था और अंत संविधान के साथ हो रहा है.जिसके जीवन में जिनवानी का बोध हो जाता है उसके जीवन में निश्चित ही संविधान का शोध हो जाता है.अपने जीवन में जब तक तुम संविधान को नहीं बनोगे तब तक गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस मानना निष्फल है.जब डॉ. भीम राव आंबेडकर ने महात्मा गाँधी को भारत का नवीन संविधान दिखाया तब महात्मा गाँधी ने यही बोला कि जब तक अपने आप को हम अनुशासित नहीं करेंगे तब तक इस संविधान का कोई लाभ नहीं होगा,और जब हम अपने आप अनुशासित कर लेंगे तब भी इस संविधान कि कोई आवश्यकता नहीं होगी.यहाँ कृष्ण नगर में २३ दिन का प्रवास वास्तव में बहुत ही ज्ञान प्रद रहा और यहाँ इतने सारे स्वाध्याय प्रेमी देखकर मुझे आचार्य हो रहा है कि दिल्ली जैसे प्रान्त में भी जिनवानी के प्रति इतनी जागरूकता है.आप सब इसी प्रकार से जिनवानी कि सेवा करते रहे यहीं हमारी मंगल भावना है और सभी को आशीर्वाद देते हुए पूज्य एलाचार्य श्री ने अपनी बात को विराम दिया.<br />
पूज्य संघ नायिका आर्यिका श्री गुरुनंदिनी माताजी ससंघ का मंगल विहार शकरपुर के लिए हुआ और गणिनी आर्यिका श्री विद्याश्री माताजी ससंघ का मंगल विहार राधेपुरी के लिए हुआ.भोजनोपरांत पुन्हा सभा एकत्रित हुई पूज्य गुरुदेव को कृष्ण नगर से विदाई देने के लिए और सभी ने भीगे नेत्रों से पूज्य गुरुदेव का मंगल विहार कृष्ण नगर से शंकर नगर जैन मंदिर के लिए कराय</p>
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		<title>फाल्गुन अष्टाह्निका के बाद होगा दिल्ली से विहार, बदायूं में पंचकल्याणक</title>
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		<pubDate>Sat, 14 Jan 2012 01:43:19 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Ankit Jain</dc:creator>
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		<description><![CDATA[दिल्ली में धर्म प्रभावना में तत्पर, प.पू. श्वेतपिच्छाचार्य श्री विद्यानंद जी मुनिराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य प.पू. अभीक्ष्ण ज्ञानोपयोगी एलाचार्य श्री वसुनंदी जी मुनिराज ससंघ के परम पुनीत सानिध्य में महाधवला महाग्रंथ की मंगलकारी वाचना ०३ जनवरी से २६ जनवरी २०१२ तक श्री दिगम्बर जैन मंदिर कृष्णा नगर दिल्ली में चल रही है.पूज्य गुरुदेव एलाचार्य श्री [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>दिल्ली में धर्म प्रभावना में तत्पर, प.पू. श्वेतपिच्छाचार्य श्री विद्यानंद जी मुनिराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य प.पू. अभीक्ष्ण ज्ञानोपयोगी एलाचार्य श्री वसुनंदी जी मुनिराज ससंघ के परम पुनीत सानिध्य में महाधवला महाग्रंथ की मंगलकारी वाचना ०३ जनवरी से २६ जनवरी २०१२ तक श्री दिगम्बर जैन मंदिर कृष्णा नगर दिल्ली में चल रही है.पूज्य गुरुदेव एलाचार्य श्री वसुनंदी जी मुनिराज ससंघ अनेकों आयोजन को कराते हुए दिल्ली महानगर में श्रावकों को धर्म ध्यान में तल्लीन करा रहे हैं.२७ जनवरी को दोपहर २ बजे कृष्णा नगर से विहार कर ३१ जनवरी को अतिशय क्षेत्र जय शांतिसागर निकेतन मंडोला में भव्य प्रवेश करेंगे जहाँ ०३ फरवरी से ०८ फरवरी २०१२ तक श्री मज्जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा एवं विश्व शांति महायज्ञ लगभग २१ साधुओं के सानिध्य में संपन्न होगा.<br />
मंडोला से विहार कर पूज्य गुरुदेव बलराम नगर, इन्द्रापुरी,करावल नगर आदि स्थानों पर होते हुए २४ फरवरी से २९ फरवरी तक श्री आदिनाथ मज्जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा संपन्न करायेंगे.ये पहली बार होगा जब दिल्ली में ५० वर्षों के इतिहास में प्रथम बार १७ पिच्छिधारी साधुओं का सानिध्य पंचकल्याणक प्रतिष्ठा में प्राप्त होगा.२४ व २५ फरवरी को गर्भ कल्याणक, २६ फरवरी को जन्म कल्याणक, २७ फरवरी को दीक्षा कल्याणक, २८ फरवरी को केवलज्ञान कल्याणक और २९ फरवरी को मोक्ष कल्याणक की क्रियाएं संपन्न होंगी.शंकर नगर पंचकल्याणक में पात्रों हेतू ०८ व ०९ जनवरी को बोली द्वारा चयन किया गया जिसमे सौधर्म इन्द्र बनने का सौभाग्य श्री अनिल जैन &#8216;सिटी किंग&#8217; को प्राप्त हुआ.<br />
पूज्य एलाचार्य श्री के संघस्थ ब्र.आशीष भैया ने बताया कि पूज्य एलाचार्य श्री वसुनंदी जी मुनिराज ससंघ दिल्ली से फाल्गुन अष्टाह्निका संपन्न कर लगभग २५० कि.मी. विहार कर उत्तर प्रदेश स्थित बदायूं में श्री मज्जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा ०२ अप्रैल से ०८ अप्रैल २०१२ तक संपन्न कराएँगे.बदायूं से विहार कर शौरिपुर-बटेश्वर,कम्पिलाजी, अहिक्षेत्र आदि तीर्थों कि वंदना करते हुए टूंडला (फिरोजाबाद) पहुचेंगे जहाँ मई माह में टूंडला चौराहा में नवनिर्मित श्री मज्जिनेन्द्र मानस्तंभ की पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव संभावित संपन्न होंगी.</p>
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		<title>दिगम्बर संत के सानिध्य में दिसम्बर के आयोजन</title>
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		<pubDate>Thu, 01 Dec 2011 15:03:46 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Ankit Jain</dc:creator>
				<category><![CDATA[News]]></category>

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		<description><![CDATA[परम पूज्य राष्ट्र संत श्वेत पिच्छाचार्य श्री विद्यानंद जी मुनिराज के परम प्रिय व आज्ञानुवर्ती शिष्य परम पूज्य अभिक्षण ज्ञानोपयोगी एलाचार्य श्र वसुनंदी जी मुनिराज ससंघ के परम पुनीत पावन सानिध्य में तीर्थंकर द्वय श्री अरहनाथ जी एवं श्री मल्लिनाथ जी का जन्म कल्याणक महोत्सव बड़े ही धूम धाम एवं भक्ति भाव से नया मंदिर, [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>परम पूज्य राष्ट्र संत श्वेत पिच्छाचार्य श्री विद्यानंद जी मुनिराज के परम प्रिय व आज्ञानुवर्ती शिष्य परम पूज्य अभिक्षण ज्ञानोपयोगी एलाचार्य श्र वसुनंदी जी मुनिराज ससंघ के परम पुनीत पावन सानिध्य में तीर्थंकर द्वय श्री अरहनाथ जी एवं श्री मल्लिनाथ जी का जन्म कल्याणक महोत्सव बड़े ही धूम धाम एवं भक्ति भाव से नया मंदिर, धर्मपुरा में 05 दिसम्बर को श्री तीर्थंकर जन्म कल्याणक महोत्सव समिति (धर्मपुरा) के आयोजन में आयोजित होगा.प्रातः 08:30 बजे से धर्म सभा के रूप में पूज्य गुरुदेव का मंगल प्रवचन और सभा में उपस्थित अतिथियों के विचार सुनने को मिलेंगे.<br />
इसी नया मंदिर के परिधि में जैन गिर्ल्स स्कूल के सभागार में शुक्रवार 02 दिसम्बर को स्कूल के विद्यार्थियों को संबोधन हेतु प्रातः 08:30 बजे से मंगल प्रवचन होंगे.</p>
<p>परम पूज्य एलाचार्य श्री 06 दिसम्बर को प्रातः 06:30 बजे चांदनी चौक से विहार कर यमुनापार स्थित श्री दिगम्बर जैन मंदिर, शंकर नगर में भव्य प्रवेश होगा और 11 दिसम्बर को गणधर वलय विधान का संगीतमय आयोजन होगा.</p>
<p>13 दिसम्बर को इन्द्रापुरी होते हुए 15 दिसम्बर को जय शांति सागर निकेतन,मंडोला (गाज़ियाबाद) में मंगल प्रवेश होगा जहाँ 18 दिसम्बर को पूज्य एलाचार्य श्री परम शिष्य पूज्य ऐलक श्री विज्ञान सागर जी महाराज का 18 वाँ दीक्षा दिवस मनाया जायेगा और नवीन दो वेदियों का शिलान्यास भी संपन्न होगा.</p>
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		<title>ऐलक विमुक्त सागर जी बनें मुनि श्री जिनानंद जी</title>
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		<pubDate>Fri, 11 Nov 2011 03:20:06 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Ankit Jain</dc:creator>
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		<description><![CDATA[हस्तिनापुर :- परम पूज्य राष्ट्र संत श्वेत पिच्छाचार्य श्री विद्यानंद जी मुनिराज के परम प्रभावक शिष्य परम पूज्य अभिक्षण ज्ञानोपयोगी एलाचार्य श्री वसुनानंदी जी मुनिराज ससंघ का पिच्छि परिवर्तन तथा ब्र.अमोलक चंद जी की क्षुल्लक दीक्षा का कार्यक्रम ही सिर्फ १० नवम्बर को होना था.प्रातः अभिषेक और गणधरवलय विधान हुआ और आहार चर्या के पश्चात् [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>हस्तिनापुर :- परम पूज्य राष्ट्र संत श्वेत पिच्छाचार्य श्री विद्यानंद जी मुनिराज के परम प्रभावक शिष्य परम पूज्य अभिक्षण ज्ञानोपयोगी एलाचार्य श्री वसुनानंदी जी मुनिराज ससंघ का पिच्छि परिवर्तन तथा ब्र.अमोलक चंद जी की क्षुल्लक दीक्षा का कार्यक्रम ही सिर्फ १० नवम्बर को होना था.प्रातः अभिषेक और गणधरवलय विधान हुआ और आहार चर्या के पश्चात् कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ. सर्वप्रथम मुनि श्री ज्ञानानंद जी व मुनि श्री सर्वानन्द जी की वाग्दिक्षा पूज्य एलाचार्य श्री के कर कमलों द्वारा संपन्न हुई एवं ब्र.अमोलक चंद जी (सरधना निवासी) की पूज्य एलाचार्य श्री द्वारा क्षुल्लक दीक्षा संपन्न हुई और नाम रखा क्षुल्लक श्री सहजानंद जी महाराज.पिच्छि परिवर्तन का कार्यक्रम प्रारंभ हुआ और सबसे छोटे क्षुल्लक श्री सुखानंद जी और फिर क्षुल्लक श्री विशंक सागर जी का पिच्छि परिवर्तन हुआ.अब ऐलक विमुक्त सागर जी का पिच्छि परिवर्तन होना था जिनसे एलाचार्य श्री ने मंच से पूछा कि &#8220;मुनि दीक्षा का क्या विचार है?&#8221; ऐलक जी ने कहा कि &#8220;यदि आप मुझे इस योग्य समझते हैं तो मुझे मुनि दीक्षा देकर मेरा सौभाग्य बढाइये&#8221;. पूज्य एलाचार्य श्री की स्वीकृति हुई और सब उपस्थित जनसमूह तथा मुनि संघ की अनुमति लेकर मुनि दीक्षा प्रारंभ हुई.कार्यक्रम में अचानक ही बदलाव आ गया और पिच्छि परिवर्तन से कार्यक्रम पुनः दीक्षा महोत्सव में बदल गया.<br />
केशलोंच की क्रिया संपन्न हुई और पश्चात् पूज्य एलाचार्य श्री ने मूलगुण संस्कार, मुनि पद पर आरूढ़ किया और नाम रखा मुनि श्री जिनानंद जी मुनिराज.सब लोग आश्चर्य चकित रह गए कि जिनकी दीक्षा कि दूर दूर तक कोई ख़बर नहीं थी उनकी अचानक ही मुनि दीक्षा संपन हुई.<br />
कार्यक्रम अपनी गति से चल रहा था और पूज्य मुनि श्री शिव सागर जी का पिच्छि परिवर्तन हुआ और अंत में पूज्य एलाचार्य श्री वसुनंदी जी मुनिराज का पिच्छि परिवर्तन हुआ.पूज्य एलाचार्य श्री की पुरानी पिच्छि श्री योगेश कुमार जैन &#8216;अरिहंत प्रकाशन&#8217; मेरठ वालों को प्राप्त हुई.कार्यक्रम के अंत में आरती कर कार्यक्रम संपन्न हुआ.</p>
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		<title>पिच्छि परिवर्तन एवं दीक्षा महोत्सव</title>
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		<pubDate>Sun, 30 Oct 2011 01:30:23 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Ankit Jain</dc:creator>
				<category><![CDATA[News]]></category>

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		<description><![CDATA[शांति,कुन्थु,अर तीर्थंकर की जन्म कल्याणक स्थली, एतिहासिक नगरी हस्तिनापुर में कार्तिक मेले के शुभ अवसर एवं चातुर्मास के निष्ठापन पर परम पूज्य राष्ट्र संत, सिद्धांत चक्रवर्ती श्वेतपिच्छाचार्य श्री विद्यानंद जी मुनिराज के परम प्रिय प्रभावक शिष्य परम पूज्य अभिक्षण ज्ञानोपयोगी एलाचार्य श्री वसुनंदी जी मुनिराज (ससंघ) का भव्य पिच्छि परिवर्तन एवं दीक्षा महोत्सव  गुरूवार दिनांक [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<div>
<p>शांति,कुन्थु,अर तीर्थंकर की जन्म कल्याणक स्थली, एतिहासिक नगरी हस्तिनापुर में कार्तिक मेले के शुभ अवसर एवं चातुर्मास के निष्ठापन पर परम पूज्य राष्ट्र संत, सिद्धांत चक्रवर्ती श्वेतपिच्छाचार्य श्री विद्यानंद जी मुनिराज के परम प्रिय प्रभावक शिष्य परम पूज्य अभिक्षण ज्ञानोपयोगी एलाचार्य श्री वसुनंदी जी मुनिराज (ससंघ) का भव्य</p>
</div>
<div>
<p style="text-align: center;"><span style="font-size: x-large;">पिच्छि परिवर्तन एवं दीक्षा महोत्सव </span></p>
</div>
<p style="text-align: center;"><a href="http://1.bp.blogspot.com/-ySwiBHRRcYM/TqymUGm1VEI/AAAAAAAAAcU/lFCl4LhdYfw/s1600/sanidhya.jpg"><img src="http://1.bp.blogspot.com/-ySwiBHRRcYM/TqymUGm1VEI/AAAAAAAAAcU/lFCl4LhdYfw/s320/sanidhya.jpg" alt="" width="320" height="186" border="0" /></a></p>
<div>
<p style="text-align: center;">गुरूवार दिनांक 10 नवम्बर 2011</p>
</div>
<div>
<p style="text-align: center;">प्रातः 10 बजे से</p>
</div>
<div>
<p style="text-align: center;">स्थान: श्री आदिवीर विद्याश्री जैन आश्रम, पाण्डवान रोड, हस्तिनापुर (मेरठ,उ.प्र.)</p>
</div>
<div>
<p>&nbsp;</p>
</div>
<div>
<p style="text-align: center;"><span style="text-decoration: underline;"><strong>कार्यक्रम </strong></span></p>
</div>
<div>
<p style="text-align: center;"><strong>9 नवम्बर </strong></p>
</div>
<div style="text-align: center;">
<p>प्रातः 7 बजे सामूहिक पूजन</p>
</div>
<div style="text-align: center;">
<p>दोपहर 2 बजे से संगीत व मेहँदी</p>
</div>
<div>
<p style="text-align: center;">संयम 5 बजे से गोद भराई एवं बिनोली</p>
</div>
<div>
<p><strong>10 नवम्बर  </strong><a href="http://1.bp.blogspot.com/-Gaeha0E9bLI/TqyluWySxQI/AAAAAAAAAcM/x-HjwrT5okE/s1600/amolak+chandji.JPG"><img class="alignright" src="http://1.bp.blogspot.com/-Gaeha0E9bLI/TqyluWySxQI/AAAAAAAAAcM/x-HjwrT5okE/s200/amolak+chandji.JPG" alt="" width="150" height="200" border="0" /></a></p>
</div>
<div>
<p>प्रातः 7 बजे से गणधर वलय विधान</p>
</div>
<div>
<p>प्रातः 10 बजे से दीक्षा संस्कार</p>
<p>मुनिद्वय श्री ज्ञानानंद जी एवं श्री सर्वानन्द जी मुनिराज की वाग्दीक्षा</p>
</div>
<div>
<p>प्रातः :11 बजे से क्षुल्लक दीक्षा संस्कार विधि</p>
</div>
<div>
<p>(सरधना निवासी ब्र.अमोलक चंद जी जैन,नवम प्रतिमा धारी)</p>
</div>
<div>
<p>दोपहर 12 बजे से पिच्छि परिवर्तन</p>
</div>
<div>
<p>दोपहर 01 बजे से चातुर्मास मंगल कलश ड्रा एवं वितरण</p>
</div>
<div>
<p>&nbsp;</p>
</div>
<div>
<p style="text-align: center;"><strong>कार्यक्रम के उपरांत भोजन ग्रहण कर अनुग्रहित करें </strong></p>
</div>
<div style="text-align: center;">
<p>&nbsp;</p>
</div>
<div style="text-align: center;">
<p><strong>आयोजक : श्री आदिवीर विद्याश्री चैरीटेबल ट्रस्ट, हस्तिनापुर </strong></p>
</div>
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		<title>Diwali Shubh ho</title>
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		<pubDate>Fri, 21 Oct 2011 02:08:39 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Ankit Jain</dc:creator>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>

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		<description><![CDATA[जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर अहिंसा के मार्ग दर्शक भगवान महावीर स्वामी के 2537 वर्ष निर्वाण के पूर्ण होने पर आप सभी को हार्दिक शुभ कामनाएं.मोक्ष कल्याणक लाडू 26 अक्टूबर को प्रातः काल चढ़ाया जायेगा.इस अवसर पर आप अपने घर में भरपूर रोशिनी और साफ़ सफाई रखें,पटाखों का इस्तेमाल न करें इससे घोर हिंसा होती [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर अहिंसा के मार्ग दर्शक भगवान महावीर स्वामी के 2537 वर्ष निर्वाण के पूर्ण होने पर आप सभी को हार्दिक शुभ कामनाएं.मोक्ष कल्याणक लाडू 26 अक्टूबर को प्रातः काल चढ़ाया जायेगा.इस अवसर पर आप अपने घर में भरपूर रोशिनी और साफ़ सफाई रखें,पटाखों का इस्तेमाल न करें इससे घोर हिंसा होती है.भगवन महावीर की विशेष पूजा-भक्ति एवं अभिषेक भी अवश्य करें. इस दिन यदि हो सके तो यथा शक्ति गरीबों को खाद्य पदार्थ प्रदान करें,मंदिर में दान दें और अपने घर में गृह लक्ष्मी को धन दें इससे घर और जीवन में सुख शांति बरक़रार रहती है.इस दिन समवशरण की स्थापना अपने घर में करें और उसी में भगवान की दिवाली पूजन करें<br />
यदि आप इस बारें में और जानना चाहते हैं की दिवाली पर क्या करें क्या न करें तो आप पूज्य एलाचार्य श्री वसुनंदी जी मुनिराज के मुखार्विंद से जान सकते है.पूज्य गुरुदेव का दिवाली के अवसर पर विशेष प्रवचन इस रविवार 23 अक्टूबर दोपहर 2 बजे से होंगे आप ए और सबको लायें</p>
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