
चैत कृष्ण नौमी को जग में,खुशियाँ खूब लुटाई थीं
जब जन्म हुआ था जिनवर का,नरकों में समता छाई थी
गर्भावतरण के नवमाह व्यतीत होने पर बाल प्रभु तीर्थंकर का जन्म होता है.संसार के कल्याण के निमित्त हुए जन्म के प्रति कृतज्ञता और भक्ति प्रदर्शित करने हेतु जन्म कल्याणक महोत्सव मनाया जाता है. इन्द्र की आज्ञा से नियुक्त देवांगनाओं द्वारा परिचर्या में माता की गर्भकालीन अवधि प्रसन्नता और विवेकपूर्ण हास परिहास में सहज व्यतीत हो जाती है. गर्भावधि पूर्ण होने पर शुभ व सुमंगल नक्षत्रों के अत्यंत शुभ संयोगों से युक्त श्रेष्ठ सुखदायक मुहूर्त में तीर्थंकर कुमार का जन्म होता है.यह जन्म किसी साधारण मनुष्य का नहीं है,यह जन्म है अतिशय पुण्यशाली तीर्थंकर प्रकृति की सत्ता वाले तीर्थ प्रवर्तक का. जिनके धरती पर जन्म लेते ही सारे शुभ व सुखद संयोग अनायास ही जुट जाते हैं. प्रकृति और प्राणियों में हर्ष का वातावरण छा जाता है.