
Shri Vasunandi Guru (English) श्री वसुनंदी गुरु (Hindi) شري فاسوناندي جور (Arabic) শ্রী ভাসুনান্দী গুরু (Bengali) σήρι βασυνανδη γύρου (Greek) શ્રી વાસુનાંડી ગુરુ (Gujrati) ಶ್ರೀ ವಸುನಂಡಿ ಗುರು (Kannada) ശരി വസുനണ്ടി ഗുരു (Malayalam) श्री वासुनंदी गुरु (Marathi) श्री वसुनंदी गुरु (Nepali) ଶ୍ରୀ ବସୁନନ୍ଦୀ ଗୁରୁ (Oriya) ਸ਼੍ਰੀ ਵਾਸੁਨਾਂਦੀ ਗੁਰੂ (Punjabi) шри васунанди гуру (Russian) ஸ்ரீ வசுனண்டி குரு [...]
Read moreधर्म के प्रति सच्चा समर्पण होने पर ही सम्यक जीवन प्रारंभ होता है. प्रसन्चित्त मानव धर्म ध्यान के अधिक निकट होता है,दुःख और शोक में डूबे महानुभाव आर्त ध्यान के पिंजरे में कैद है. सत्पुरुषों की म्हणता उनके विशुद्ध अन्तःकरण के आधार से है, लोगों की प्रशंसा के आधार पर नहीं.
Read moreॐ नमः जय स्वाहा – दिन में कम से कम एक बार बोलने से सभी कार्य बनते है. प्रत्येक को अपने घर में कल्पवृक्ष,कामधेनु व चिंतामणि रत्ना का चित्र रखना चाहिए व्रतियों, महाव्रतियों को आहार करना चाहिए साकार परमात्मा की उपासना करना चाहिए प्रतिदिन दान करना चाहिए अतिथि सेवा दिन में ब्रहमचर्य का पालन अवस्त्र [...]
Read more1)गर अम्बर न होगा तो ये सितारे क्या करेंगे समुंदर न होगा तो ये किनारे क्या करेंगे गर दिल में श्रधा की ज्योति न जली तो ये मंदिर, ये मस्जिद , ये गुरूद्वारे क्या करेंगे 2)परखना मत परखने से कोई अपना नहीं रहता किसी भी आइने में देर तक चेहरा नहीं रहता बड़े लोगों से [...]
Read more“घर के मुखिया को या समाज के प्रधान को या देश के राजा को या प्रांतीय नेता या संस्था को, संघ के प्रधान या नायक या संचालक को मुख की तरह होना चाहिए. मुखिया प्रत्येक वर्ग की इकाई का अपनी तरह खुअल रखे,मुख से ग्रहण किया गया भोजन यथानुपात समस्त अंगों को सारभूत रूप से [...]
Read more1 धागे में गांठ लगी हो,तो वह सुई की नोंक में नहीं घुस सकता और उससे सिलाई नहीं हो सकती. मन में स्वार्थ भरी संकीर्णता की गांठ लगी है तो वह इश्वर से नहीं लग सकता.जीवन में कोई भी लक्ष्य प्राप्त नहीं कर सकता. 2 पतंगे को दीपक का प्रकाश मिल जाये तो वह अँधेरे [...]
Read more“एक सज्जन पुरुष ने पूछा कि “यदि शास्त्रों में से प्रथमानुयोग को निकाल दें तो क्या हानि है?उसमे सिवाय कथा-कहानी के है क्या? वह भी मात्र अलंकर व साहित्यिक शैली में,उसके द्वारा आत्मा का क्या खाक हित होगा? मैंने कहा बिना प्रथमानुयोग के अन्य अनुयोग हो ही नहीं सकते जैसे गिनती में एक के बिना [...]
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