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21अप्रैल वेदी एवं शिखर जीर्णोद्धार हेतु जाप्यानुष्ठान प्रारंभ,जवाहर पार्क, लक्ष्मी नगर
24 अप्रैल से 29 अप्रैल तक पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव श्री दिगम्बर जैन मंदिर, इन्द्रपुरी (लोनी)

Vichar

  • Guru Naam

    Shri Vasunandi Guru  (English) श्री वसुनंदी गुरु  (Hindi) شري فاسوناندي جور  (Arabic) শ্রী ভাসুনান্দী গুরু  (Bengali) σήρι βασυνανδη γύρου  (Greek) શ્રી વાસુનાંડી ગુરુ  (Gujrati) ಶ್ರೀ ವಸುನಂಡಿ ಗುರು  (Kannada) ശരി വസുനണ്ടി ഗുരു  (Malayalam) श्री वासुनंदी गुरु  (Marathi) श्री वसुनंदी गुरु  (Nepali) ଶ୍ରୀ ବସୁନନ୍ଦୀ ଗୁରୁ  (Oriya) ਸ਼੍ਰੀ ਵਾਸੁਨਾਂਦੀ ਗੁਰੂ  (Punjabi) шри васунанди гуру  (Russian) ஸ்ரீ வசுனண்டி குரு  [...]

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  • गुरु कृपा

    धर्म के प्रति सच्चा समर्पण होने पर ही सम्यक जीवन प्रारंभ होता है. प्रसन्चित्त मानव धर्म ध्यान के अधिक निकट होता है,दुःख और शोक में डूबे महानुभाव आर्त ध्यान के पिंजरे में कैद है. सत्पुरुषों की म्हणता उनके विशुद्ध अन्तःकरण के आधार से है, लोगों की प्रशंसा के आधार पर नहीं.  

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  • ग्रह शांति के अचूक 50 सूत्र

    ॐ नमः जय स्वाहा – दिन में कम से कम एक बार बोलने से सभी कार्य बनते है. प्रत्येक को अपने घर में कल्पवृक्ष,कामधेनु व चिंतामणि रत्ना का चित्र रखना चाहिए व्रतियों, महाव्रतियों को आहार करना चाहिए साकार परमात्मा की उपासना करना चाहिए प्रतिदिन दान करना चाहिए अतिथि सेवा दिन में ब्रहमचर्य का पालन अवस्त्र [...]

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  • Muktak मुक्तक

    1)गर अम्बर न होगा तो ये सितारे क्या करेंगे समुंदर न होगा तो ये किनारे क्या करेंगे गर दिल में श्रधा की ज्योति न जली तो ये मंदिर, ये मस्जिद , ये गुरूद्वारे क्या करेंगे 2)परखना मत परखने से कोई अपना नहीं रहता किसी भी आइने में देर तक चेहरा नहीं रहता बड़े लोगों से [...]

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  • मुखिया मुख सा चाहिए

    “घर के मुखिया को या समाज के प्रधान को या देश के राजा को या प्रांतीय नेता या संस्था को, संघ के प्रधान या नायक या संचालक को मुख की तरह होना चाहिए. मुखिया प्रत्येक वर्ग की इकाई का अपनी तरह खुअल रखे,मुख से ग्रहण किया गया भोजन यथानुपात समस्त अंगों को सारभूत रूप से [...]

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  • उवाच

    1 धागे में गांठ लगी हो,तो वह सुई की नोंक में नहीं घुस सकता और उससे सिलाई नहीं हो सकती. मन में स्वार्थ भरी संकीर्णता की गांठ लगी है तो वह इश्वर से नहीं लग सकता.जीवन में कोई भी लक्ष्य प्राप्त नहीं कर सकता. 2 पतंगे को दीपक का प्रकाश मिल जाये तो वह अँधेरे [...]

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  • तो क्या हानि है ?

    “एक सज्जन पुरुष ने पूछा कि “यदि शास्त्रों में से प्रथमानुयोग को निकाल दें तो क्या हानि है?उसमे सिवाय कथा-कहानी के है क्या? वह भी मात्र अलंकर व साहित्यिक शैली में,उसके द्वारा आत्मा का क्या खाक हित होगा? मैंने कहा बिना प्रथमानुयोग के अन्य अनुयोग हो ही नहीं सकते जैसे गिनती में एक के बिना [...]

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